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शर्म........!!!!!

 जरा उड़ान क्या भरी मेरे मन ने 
की लोग कहने लगे ..
नादान लड़की क्या तुझे शर्म नहीं आती।
लड़की है तू संभल जा 
तो पूछती हूँ मैं भी इन समझदारो से,
गला जब तुम मेरी खुशियों का घोटते हो तो क्या 
तुम्हे शर्म नहीं आती , शर्म है  क्या कोई बताये इन्हें भी
जो इल्जाम बेशर्मी का लगाते  हैं 
लड़की को जब तड़पाते हैं तब तमाशा देखने में ये ही आगे हैं।
और शर्म हैं क्या मुझे सिखाते हैं।
जाओ पहले देखो अपने अन्दर .. बंद करके कहना शर्म नहीं आती 
शर्म नहीं आती।

By Santoshi Rawat.
TGT Science Teacher
New Delhi

Comments

  1. बेहद संवेदनशील प्रस्तुति
    अरुन शर्मा
    www.arunsblog.in

    ReplyDelete
  2. उत्कृष्ट प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. जाओ पहले देखो अपने अन्दर .. बंद करके कहना शर्म नहीं आती
    शर्म नहीं आती।
    .... विचारणीय विषय लिए कविता

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - बृहस्पतिवार- 29/08/2013 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः8 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

    ReplyDelete

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